श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 80: राजाके लिये मित्र और अमित्रकी पहचान तथा उन सबके साथ नीतिपूर्ण बर्तावका और मन्त्रीके लक्षणोंका वर्णन  »  श्लोक 22-23
 
 
श्लोक  12.80.22-23 
मेधावी स्मृतिमान् दक्ष: प्रकृत्या चानृशंस्यवान्।
यो मानितोऽमानितो वा न च दुष्येत् कदाचन॥ २२॥
ऋत्विग्वा यदि वाऽऽचार्य: सखा वात्यन्तसंस्तुत:।
गृहे वसेदमात्यस्ते स स्यात् परमपूजित:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
ऐसा व्यक्ति यदि उत्तम बुद्धि और तीव्र स्मरण शक्ति वाला हो, जो काम के साधनों में कुशल हो और स्वभाव से दयालु हो तथा सम्मान या अपमान होने पर जिसके हृदय में द्वेष या घृणा उत्पन्न न हो, ऐसा व्यक्ति यदि ऋत्विज, आचार्य या अत्यंत प्रशंसित मित्र हो, तो उसे आपके घर में मंत्री बनकर रहना चाहिए और आपको उसका विशेष आदर और सत्कार करना चाहिए ॥22-23॥
 
If such a person has a good intellect and sharp memory, who is skilled in the tools of work and is kind by nature and who does not develop hatred or malice in his heart when he is honored or insulted, if such a person is a Ritwij, an Acharya or a highly praised friend, then he should stay in your house as a minister and you should give him special respect and honor. 22-23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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