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श्लोक 12.80.2  |
किंशील: किंसमाचारो राज्ञोऽथ सचिवो भवेत्।
कीदृशे विश्वसेद् राजा कीदृशे न च विश्वसेत्॥ २॥ |
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| अनुवाद |
| अतः राजा की सहायता करने वाले सचिव (मंत्री) का स्वभाव और आचरण कैसा होना चाहिए? राजा को किस प्रकार के मंत्री पर विश्वास करना चाहिए और किस प्रकार के मंत्री पर नहीं?॥2॥ |
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| So what should be the nature and conduct of the secretary (minister) who assists the king? What kind of minister should the king trust and what kind should he not trust?॥2॥ |
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