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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 80: राजाके लिये मित्र और अमित्रकी पहचान तथा उन सबके साथ नीतिपूर्ण बर्तावका और मन्त्रीके लक्षणोंका वर्णन
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श्लोक 17
श्लोक
12.80.17
यन्मन्येत ममाभावादस्याभावो भवेदिति।
तस्मिन् कुर्वीत विश्वासं यथा पितरि वै तथा॥ १७॥
अनुवाद
जिसके विषय में यह विश्वास हो कि यदि मैं नहीं रहूँगा तो यह भी नहीं रहेगा, उस पर पिता के समान विश्वास करना चाहिए ॥17॥
One about whom one has the belief that if I am not there then this one too will not be there, he should be trusted like a father. ॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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