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श्लोक 12.80.14  |
यस्य क्षेत्रादप्युदकं क्षेत्रमन्यस्य गच्छति।
न तत्रानिच्छतस्तस्य भिद्येरन् सर्वसेतव:॥ १४॥ |
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| अनुवाद |
| जिस व्यक्ति के खेत से होकर वर्षा का पानी दूसरे के खेत में जाता हो, उसके खेत की सीमा या किनारा उसकी सहमति के बिना नहीं तोड़ना चाहिए ॥14॥ |
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| The boundary or border of the field of the person through whose field rain water passes to reach another's field should not be broken without his consent. ॥ 14॥ |
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