Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.80.10: किसी पर भी अत्यधिक विश्वास करने से धर्म और धन दोनों का नाश हो जाता है, तथा सब पर अविश्वास करना मृत्यु से भी बदतर है ॥10॥   |   mahabharat अध्याय 12.80: राजाके लिये मित्र और अमित्रकी पहचान तथा उन सबके साथ नीतिपूर्ण बर्तावका और मन्त्रीके लक्षणोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 80: राजाके लिये मित्र और अमित्रकी पहचान तथा उन सबके साथ नीतिपूर्ण बर्तावका और मन्त्रीके लक्षणोंका वर्णन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  12.80.10 
एकान्तेन हि विश्वास: कृत्स्नो धर्मार्थनाशक:।
अविश्वासश्च सर्वत्र मृत्युना च विशिष्यते॥ १०॥
 
 
अनुवाद
किसी पर भी अत्यधिक विश्वास करने से धर्म और धन दोनों का नाश हो जाता है, तथा सब पर अविश्वास करना मृत्यु से भी बदतर है ॥10॥
 
Excessive trust in anyone destroys both religion and wealth, and distrusting everyone is worse than death. ॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)