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श्लोक 12.80.1  |
युधिष्ठिर उवाच
यदप्यल्पतरं कर्म तदप्येकेन दुष्करम्।
पुरुषेणासहायेन किमु राज्ञा पितामह॥ १॥ |
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| अनुवाद |
| युधिष्ठिर ने पूछा - पितामह! छोटे से छोटा कार्य भी किसी की सहायता के बिना अकेले पूरा करना कठिन है। फिर राजा दूसरों की सहायता के बिना महान राज्य कैसे चला सकता है?॥1॥ |
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| Yudhishthira asked - Grandfather! Even the smallest of tasks is difficult to be accomplished by a single person without someone's help. Then how can a king run a great kingdom without the help of others?॥1॥ |
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