श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 80: राजाके लिये मित्र और अमित्रकी पहचान तथा उन सबके साथ नीतिपूर्ण बर्तावका और मन्त्रीके लक्षणोंका वर्णन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.80.1 
युधिष्ठिर उवाच
यदप्यल्पतरं कर्म तदप्येकेन दुष्करम्।
पुरुषेणासहायेन किमु राज्ञा पितामह॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा - पितामह! छोटे से छोटा कार्य भी किसी की सहायता के बिना अकेले पूरा करना कठिन है। फिर राजा दूसरों की सहायता के बिना महान राज्य कैसे चला सकता है?॥1॥
 
Yudhishthira asked - Grandfather! Even the smallest of tasks is difficult to be accomplished by a single person without someone's help. Then how can a king run a great kingdom without the help of others?॥1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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