श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 8: अर्जुनका युधिष्ठिरके मतका निराकरण करते हुए उन्हें धनकी महत्ता बताना और राजधर्मके पालनके लिये जोर देते हुए यज्ञानुष्ठानके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  12.8.5 
क्लीबस्य हि कुतो राज्यं दीर्घसूत्रस्य वा पुन:।
किमर्थं च महीपालानवधी: क्रोधमूर्छित:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
कायर और आलसी मनुष्य को राज्य कैसे मिल सकता है? यदि तुम्हें यही करना था, तो तुमने क्रोध करके इतने राजाओं को क्यों मारा और मरवाया?॥5॥
 
How can a coward or a lazy person get a kingdom? If this is what you wanted to do, then why did you kill so many kings in anger and get them killed?॥ 5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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