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mahabharat 12.8.4: तुमने अपने शत्रुओं का वध करके इस पृथ्वी पर अधिकार प्राप्त किया है। तुमने अपने धर्मानुसार यह राज्य-धन प्राप्त किया है। इस प्रकार यह सब तुम्हारे हाथ में आ गया है, फिर भी तुम अपनी अल्प बुद्धि के कारण इसे क्यों छोड़ रहे हो?॥4॥   |   mahabharat अध्याय 12.8: अर्जुनका युधिष्ठिरके मतका निराकरण करते हुए उन्हें धनकी महत्ता बताना और राजधर्मके पालनके लिये जोर देते हुए यज्ञानुष्ठानके लिये प्रेरित करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 8: अर्जुनका युधिष्ठिरके मतका निराकरण करते हुए उन्हें धनकी महत्ता बताना और राजधर्मके पालनके लिये जोर देते हुए यज्ञानुष्ठानके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.8.4 
शत्रून् हत्वा महीं लब्ध्वा स्वधर्मेणोपपादिताम्।
एवंविधं कथं सर्वं त्यजेथा बुद्धिलाघवात्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
तुमने अपने शत्रुओं का वध करके इस पृथ्वी पर अधिकार प्राप्त किया है। तुमने अपने धर्मानुसार यह राज्य-धन प्राप्त किया है। इस प्रकार यह सब तुम्हारे हाथ में आ गया है, फिर भी तुम अपनी अल्प बुद्धि के कारण इसे क्यों छोड़ रहे हो?॥4॥
 
You have gained control over this earth by killing your enemies. You have received this wealth of the kingdom according to your Dharma. In this way, all this has come into your hands, why are you leaving it due to your limited intelligence?॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)