Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.8.37: यह क्षत्रियों के कल्याण का सनातन मार्ग है। इसका अन्त कभी नहीं सुना गया। हे राजन! यह वह महान मार्ग है जिस पर दस रथ चलते हैं। किसी भी बुरे मार्ग का आश्रय न लें। 37। | mahabharat अध्याय 12.8: अर्जुनका युधिष्ठिरके मतका निराकरण करते हुए उन्हें धनकी महत्ता बताना और राजधर्मके पालनके लिये जोर देते हुए यज्ञानुष्ठानके लिये प्रेरित करना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यह क्षत्रियों के कल्याण का सनातन मार्ग है। इसका अन्त कभी नहीं सुना गया। हे राजन! यह वह महान मार्ग है जिस पर दस रथ चलते हैं। किसी भी बुरे मार्ग का आश्रय न लें। 37।
This is the eternal path of welfare for the Kshatriyas. Its end has never been heard of. O King! This is the great path on which ten chariots move. Do not take shelter of any evil path. 37.
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि अर्जुनवाक्ये अष्टमोऽध्याय:॥ ८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें अर्जुनवाक्यविषयक आठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ८॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥