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mahabharat 12.8.36: सम्पूर्ण जगत् के स्वरूप महादेवजी ने सर्वमेध नामक महायज्ञ में सम्पूर्ण भूतों तथा स्वयं की भी आहुति दे दी थी ॥36॥   |   mahabharat अध्याय 12.8: अर्जुनका युधिष्ठिरके मतका निराकरण करते हुए उन्हें धनकी महत्ता बताना और राजधर्मके पालनके लिये जोर देते हुए यज्ञानुष्ठानके लिये प्रेरित करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 8: अर्जुनका युधिष्ठिरके मतका निराकरण करते हुए उन्हें धनकी महत्ता बताना और राजधर्मके पालनके लिये जोर देते हुए यज्ञानुष्ठानके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  12.8.36 
विश्वरूपो महादेव: सर्वमेधे महामखे।
जुहाव सर्वभूतानि तथैवात्मानमात्मना॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
सम्पूर्ण जगत् के स्वरूप महादेवजी ने सर्वमेध नामक महायज्ञ में सम्पूर्ण भूतों तथा स्वयं की भी आहुति दे दी थी ॥36॥
 
Mahadevji, who is the form of the entire world, had sacrificed all the ghosts and himself in the Mahayagya named Sarvamedha. 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)