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mahabharat 12.8.3: अर्जुन बोले - हे राजन! यह बड़े दुःख और पीड़ा की बात है। आपकी व्याकुलता चरम पर पहुँच गई है। यह आश्चर्य की बात है कि आप असाधारण पराक्रम से प्राप्त इस उत्तम राजसी धन का परित्याग कर रहे हैं।   |   mahabharat अध्याय 12.8: अर्जुनका युधिष्ठिरके मतका निराकरण करते हुए उन्हें धनकी महत्ता बताना और राजधर्मके पालनके लिये जोर देते हुए यज्ञानुष्ठानके लिये प्रेरित करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 8: अर्जुनका युधिष्ठिरके मतका निराकरण करते हुए उन्हें धनकी महत्ता बताना और राजधर्मके पालनके लिये जोर देते हुए यज्ञानुष्ठानके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.8.3 
अर्जुन उवाच
अहो दु:खमहो कृच्छ्रमहो वैक्लव्यमुत्तमम्।
यत् कृत्वामानुषं कर्म त्यजेथा: श्रियमुत्तमाम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन बोले - हे राजन! यह बड़े दुःख और पीड़ा की बात है। आपकी व्याकुलता चरम पर पहुँच गई है। यह आश्चर्य की बात है कि आप असाधारण पराक्रम से प्राप्त इस उत्तम राजसी धन का परित्याग कर रहे हैं।
 
Arjun said - O King! This is a matter of great sorrow and great pain. Your agitation has reached its peak. It is surprising that you are abandoning this excellent royal wealth which you have obtained by performing extraordinary feats.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)