श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 8: अर्जुनका युधिष्ठिरके मतका निराकरण करते हुए उन्हें धनकी महत्ता बताना और राजधर्मके पालनके लिये जोर देते हुए यज्ञानुष्ठानके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  12.8.24 
य: कृशार्थ: कृशगव: कृशभृत्य: कृशातिथि:।
स वै राजन् कृशो नाम न शरीरकृश: कृश:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
राजा! जिसके पास धन की कमी हो, जिसके पास गौएँ और नौकर-चाकर बहुत कम हों और जिसके यहाँ अतिथि बहुत कम आते हों, वह व्यक्ति दुर्बल कहलाने योग्य ही है। जो केवल शारीरिक रूप से दुर्बल हो, उसे दुर्बल नहीं कहा जा सकता॥ 24॥
 
King! One who is short of money, has very few cows and servants and whose guests have rarely visited him, is indeed worthy of being called weak. One who is only physically weak cannot be called weak.॥ 24॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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