| श्री महाभारत » पर्व 12: शान्ति पर्व » अध्याय 8: अर्जुनका युधिष्ठिरके मतका निराकरण करते हुए उन्हें धनकी महत्ता बताना और राजधर्मके पालनके लिये जोर देते हुए यज्ञानुष्ठानके लिये प्रेरित करना » श्लोक 21 |
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| | | | श्लोक 12.8.21  | धर्म: कामश्च स्वर्गश्च हर्ष: क्रोध: श्रुतं दम:।
अर्थादेतानि सर्वाणि प्रवर्तन्ते नराधिप॥ २१॥ | | | | | | अनुवाद | | नरेश्वर! धन से धर्मपालन, कामनापूर्ति, स्वर्ग प्राप्ति, आनन्द की वृद्धि, क्रोध में सफलता, शास्त्रों का श्रवण और अध्ययन तथा शत्रुओं का दमन - ये सब कार्य सिद्ध होते हैं ॥21॥ | | | | Nareshwar! Through wealth, adherence to religion, fulfillment of desires, attainment of heaven, increase of joy, success in anger, hearing and study of scriptures and suppression of enemies – all these tasks are accomplished. 21॥ | | ✨ ai-generated | | |
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