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mahabharat 12.8.19: जिसके पास धन है उसके बहुत से मित्र होते हैं; जिसके पास धन है उसके भाई और सम्बन्धी होते हैं; इस संसार में जिसके पास धन है, वह मनुष्य कहलाता है और जिसके पास धन है, वह विद्वान माना जाता है।   |   mahabharat अध्याय 12.8: अर्जुनका युधिष्ठिरके मतका निराकरण करते हुए उन्हें धनकी महत्ता बताना और राजधर्मके पालनके लिये जोर देते हुए यज्ञानुष्ठानके लिये प्रेरित करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 8: अर्जुनका युधिष्ठिरके मतका निराकरण करते हुए उन्हें धनकी महत्ता बताना और राजधर्मके पालनके लिये जोर देते हुए यज्ञानुष्ठानके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  12.8.19 
यस्यार्थास्तस्य मित्राणि यस्यार्थास्तस्य बान्धवा:।
यस्यार्था: स पुमाँल्लोके यस्यार्था: स च पण्डित:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
जिसके पास धन है उसके बहुत से मित्र होते हैं; जिसके पास धन है उसके भाई और सम्बन्धी होते हैं; इस संसार में जिसके पास धन है, वह मनुष्य कहलाता है और जिसके पास धन है, वह विद्वान माना जाता है।
 
He who has wealth has many friends; he who has wealth has brothers and relatives; he who has wealth in this world is called a man and he who has wealth is considered a scholar.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)