Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.8.12: यह भी तुम भली-भाँति जानते हो कि अगले दिन के लिए संग्रह न करके प्रतिदिन भिक्षा माँगना ही ऋषियों और मुनियों का धर्म है। जिसे राजाओं का धर्म कहा गया है, वह धन से ही सिद्ध होता है॥12॥   |   mahabharat अध्याय 12.8: अर्जुनका युधिष्ठिरके मतका निराकरण करते हुए उन्हें धनकी महत्ता बताना और राजधर्मके पालनके लिये जोर देते हुए यज्ञानुष्ठानके लिये प्रेरित करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 8: अर्जुनका युधिष्ठिरके मतका निराकरण करते हुए उन्हें धनकी महत्ता बताना और राजधर्मके पालनके लिये जोर देते हुए यज्ञानुष्ठानके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  12.8.12 
अश्वस्तनमृषीणां हि विद्यते वेद तद् भवान्।
यं त्विमं धर्ममित्याहुर्धनादेष प्रवर्तते॥ १२॥
 
 
अनुवाद
यह भी तुम भली-भाँति जानते हो कि अगले दिन के लिए संग्रह न करके प्रतिदिन भिक्षा माँगना ही ऋषियों और मुनियों का धर्म है। जिसे राजाओं का धर्म कहा गया है, वह धन से ही सिद्ध होता है॥12॥
 
You also know this very well that begging for food every day instead of hoarding for the next day is the religion of sages and saints. What is called the religion of kings is accomplished only through wealth.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)