Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.79.9: दूसरी ओर वेदों की यह आज्ञा भी सुनाई देती है कि प्रत्येक धर्मात्मा मनुष्य को यज्ञ करना चाहिए। यदि कोई दरिद्र व्यक्ति श्रद्धा के आधार पर यज्ञ में लग जाए और उचित दक्षिणा देने में असमर्थ हो, तो वह यज्ञ मिथ्या भावों से भर जाएगा; उस स्थिति में श्रद्धा उसकी न्यूनता की पूर्ति कैसे कर सकेगी? 9॥ | mahabharat अध्याय 12.79: ऋत्विजोंके लक्षण, यज्ञ और दक्षिणाका महत्त्व तथा तपकी श्रेष्ठता । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दूसरी ओर वेदों की यह आज्ञा भी सुनाई देती है कि प्रत्येक धर्मात्मा मनुष्य को यज्ञ करना चाहिए। यदि कोई दरिद्र व्यक्ति श्रद्धा के आधार पर यज्ञ में लग जाए और उचित दक्षिणा देने में असमर्थ हो, तो वह यज्ञ मिथ्या भावों से भर जाएगा; उस स्थिति में श्रद्धा उसकी न्यूनता की पूर्ति कैसे कर सकेगी? 9॥
On the other hand, the command of Vedas is also heard that every devout man should perform Yagya. If a poor person engages in Yagya on the basis of faith and is unable to give proper Dakshina, then that Yagya will be filled with false intentions; In that situation, how will faith be able to compensate for its shortcomings? 9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥