Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.79.8: अतः दक्षिणा के रूप में दिए गए धन के संबंध में शास्त्रों का यह कथन वर्तमान धर्मग्रंथों के अनुरूप नहीं है। मेरे मत में, शास्त्रों का यह आदेश खतरनाक है क्योंकि यह यह नहीं देखता कि दानकर्ता में कितनी दान शक्ति है। 8. | mahabharat अध्याय 12.79: ऋत्विजोंके लक्षण, यज्ञ और दक्षिणाका महत्त्व तथा तपकी श्रेष्ठता । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नेदं प्रतिधनं शास्त्रमापद्धर्मानुशास्त्रत:।
आज्ञा शास्त्रस्य घोरेयं न शक्तिं समवेक्षते॥ ८॥
अनुवाद
अतः दक्षिणा के रूप में दिए गए धन के संबंध में शास्त्रों का यह कथन वर्तमान धर्मग्रंथों के अनुरूप नहीं है। मेरे मत में, शास्त्रों का यह आदेश खतरनाक है क्योंकि यह यह नहीं देखता कि दानकर्ता में कितनी दान शक्ति है। 8.
Therefore, this statement of the scriptures regarding the money given as dakshina is not in accordance with the current religious scriptures. In my opinion, this command of the scriptures is dangerous because it does not look at the amount of donation power the donor has. 8.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥