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श्लोक 12.79.21  |
सर्वं जिह्मं मृत्युपदमार्जवं ब्रह्मण: पदम्।
एतावान् ज्ञानविषय: किं प्रलाप: करिष्यति॥ २१॥ |
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| अनुवाद |
| सब प्रकार के छल-कपट मृत्यु की ओर ले जाते हैं और सरलता ही परमात्मा की प्राप्ति कराती है। यही एकमात्र ज्ञान का विषय है, शेष सब तो केवल बकवास है; इससे क्या लाभ?॥ 21॥ |
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| All deceitfulness leads to death and simplicity leads to the attainment of the Supreme Being. This is the only subject of knowledge and everything else is mere nonsense; what use will it be?॥ 21॥ |
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इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि एकोनाशीतितमोऽध्याय:॥ ७९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें उन्यासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ७९॥
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