| श्री महाभारत » पर्व 12: शान्ति पर्व » अध्याय 79: ऋत्विजोंके लक्षण, यज्ञ और दक्षिणाका महत्त्व तथा तपकी श्रेष्ठता » श्लोक 2 |
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| | | | श्लोक 12.79.2  | भीष्म उवाच
प्रतिकर्म पराचार ऋत्विजां स्म विधीयते।
छन्द: सामादि विज्ञाय द्विजानां श्रुतमेव च॥ २॥ | | | | | | अनुवाद | | भीष्मजी बोले - राजन! जिन ब्राह्मणों ने काव्यशास्त्र, ऋक्, साम और यजु नामक तीनों वेदों तथा ऋषियों द्वारा रचित स्मृति और दर्शन का ज्ञान प्राप्त कर लिया है, वे ही ऋत्विज् होने के अधिकारी हैं। उन ऋत्विज् का मुख्य आचरण है - राजा के लिए शांति, पौष्टिक आदि कर्मों का अनुष्ठान करना।॥2॥ | | | | Bhishmaji said – King! Those Brahmins who have acquired the knowledge of poetry, the three Vedas named 'Rik, 'Sama' and 'Yaju' and the Smriti and philosophy written by the sages are eligible to be 'Ritvij'. The main conduct of those Ritvij is - the rituals of 'peace', 'nutritional' etc. deeds for the king. 2॥ | | ✨ ai-generated | | |
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