Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.79.11: पिताजी! दक्षिणा यज्ञ का एक अंग है। यह वैदिक यज्ञों का विस्तार करती है और उनकी कमी को पूरा करती है। दक्षिणा के बिना यज्ञ यजमान को किसी भी प्रकार से मुक्ति नहीं दिला सकता। 11. | mahabharat अध्याय 12.79: ऋत्विजोंके लक्षण, यज्ञ और दक्षिणाका महत्त्व तथा तपकी श्रेष्ठता । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यज्ञाङ्गं दक्षिणा तात वेदानां परिबृंहणम्।
न यज्ञा दक्षिणाहीनास्तारयन्ति कथंचन॥ ११॥
अनुवाद
पिताजी! दक्षिणा यज्ञ का एक अंग है। यह वैदिक यज्ञों का विस्तार करती है और उनकी कमी को पूरा करती है। दक्षिणा के बिना यज्ञ यजमान को किसी भी प्रकार से मुक्ति नहीं दिला सकता। 11.
Father! Dakshina is a part of Yagyas. It is the one that expands the Vedic Yagyas and fulfills the deficiency in them. Yagyas without Dakshina cannot liberate the Yajaman in any way. 11.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥