श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 79: ऋत्विजोंके लक्षण, यज्ञ और दक्षिणाका महत्त्व तथा तपकी श्रेष्ठता  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.79.1 
युधिष्ठिर उवाच
क्वसमुत्था: कथंशीला ऋत्विज: स्यु: पितामह।
कथंविधाश्च राजेन्द्र तद् ब्रूहि वदतां वर॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा - राजेन्द्र! पितामह श्रेष्ठ वक्ता हैं! ऋत्विजों की उत्पत्ति किस कारण से हुई? उनका स्वभाव कैसा होना चाहिए? और वे किस प्रकार के हैं? ये सब बातें मुझसे कहिए। 1॥
 
Yudhishthir asked – Rajendra! Grandfather is the best speaker! For what reason did the Ritvijas originate? What should their nature be like? And what types are they? Tell me all these things. 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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