Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.78.9: युधिष्ठिर! इस विषय में मैं तुम्हें वह धर्म बता रहा हूँ जो अनादि काल से आचरणशील पुरुषों के लिए प्रचलित है। सुनो।   |   mahabharat अध्याय 12.78: आपत्तिकालमें ब्राह्मणके लिये वैश्यवृत्तिसे निर्वाह करनेकी छूट तथा लुटेरोंसे अपनी और दूसरोंकी रक्षा करनेके लिये सभी जातियोंको शस्त्र धारण करनेका अधिकार एवं रक्षकको सम्मानका पात्र स्वीकार करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 78: आपत्तिकालमें ब्राह्मणके लिये वैश्यवृत्तिसे निर्वाह करनेकी छूट तथा लुटेरोंसे अपनी और दूसरोंकी रक्षा करनेके लिये सभी जातियोंको शस्त्र धारण करनेका अधिकार एवं रक्षकको सम्मानका पात्र स्वीकार करना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  12.78.9 
अत्र ते वर्तयिष्यामि यथा धर्म: सनातन:।
व्यवहारप्रवृत्तानां तन्निबोध युधिष्ठिर॥ ९॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! इस विषय में मैं तुम्हें वह धर्म बता रहा हूँ जो अनादि काल से आचरणशील पुरुषों के लिए प्रचलित है। सुनो।
 
Yudhishthira! In this matter I am telling you the Dharma that has been followed since time immemorial for practical men. Listen.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)