नित्यं यस्तु सतो रक्षेदसतश्च निवर्तयेत्।
स एव राजा कर्तव्यस्तेन सर्वमिदं धृतम्॥ ४४॥
अनुवाद
जो सदा सज्जनों की रक्षा करता है और दुष्टों को दण्ड देता है तथा उन्हें बुरे कर्म करने से रोकता है, उसे ही राजा बनाना चाहिए, क्योंकि वही सम्पूर्ण जगत को सुरक्षित रखता है।
He who always protects the virtuous and punishes the wicked and prevents them from committing evil deeds should be made the king because it is he who keeps the whole world safe.
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि अष्टसप्ततितमोऽध्याय:॥ ७८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें अठहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ७८॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥