भीष्म उवाच
अपारे यो भवेत् पारमप्लवे य: प्लवो भवेत्।
शूद्रो वा यदि वाप्यन्य: सर्वथा मानमर्हति॥ ३८॥
अनुवाद
भीष्म ने कहा, "पुत्र! जो व्यक्ति किसी व्यक्ति को बड़ी कठिनाई से उबारता है, जो नाव के अभाव में नाव बनकर डूबते हुए व्यक्ति को सहारा देता है, वह चाहे शूद्र हो या कोई अन्य व्यक्ति, पूर्ण सम्मान का पात्र है।"
Bhishma said, "Son! He who helps a person overcome a great difficulty, he who becomes a boat and supports a drowning person in the absence of a boat, he, be it a Shudra or any other person, is worthy of complete respect."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥