Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.78.33: सबके प्रति मैत्रीभाव रखने वाले पुरुष भी किसी दुष्ट व्यक्ति के प्रति क्रूरता का व्यवहार करके (दूसरों की रक्षा के लिए) उत्तम स्वर्ग को प्राप्त होते हैं और किसी की रक्षा के लिए पाप (हिंसा आदि) करते हुए भी पुण्यात्मा पुरुष परम मोक्ष को प्राप्त होते हैं ॥ 33॥ | mahabharat अध्याय 12.78: आपत्तिकालमें ब्राह्मणके लिये वैश्यवृत्तिसे निर्वाह करनेकी छूट तथा लुटेरोंसे अपनी और दूसरोंकी रक्षा करनेके लिये सभी जातियोंको शस्त्र धारण करनेका अधिकार एवं रक्षकको सम्मानका पात्र स्वीकार करना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सबके प्रति मैत्रीभाव रखने वाले पुरुष भी किसी दुष्ट व्यक्ति के प्रति क्रूरता का व्यवहार करके (दूसरों की रक्षा के लिए) उत्तम स्वर्ग को प्राप्त होते हैं और किसी की रक्षा के लिए पाप (हिंसा आदि) करते हुए भी पुण्यात्मा पुरुष परम मोक्ष को प्राप्त होते हैं ॥ 33॥
Even men having friendly feelings towards all, by behaving cruelly towards some wicked person (to protect others) attain the best heavenly abode and even while committing sins (violence etc.) to protect someone, the virtuous men attain the ultimate salvation. ॥ 33॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥