Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.78.3: युधिष्ठिर ने पूछा - भरतश्रेष्ठ! कृपा करके मुझे यह बताइए कि यदि कोई ब्राह्मण वैश्य धर्म से जीविका चलाते हुए व्यापार भी करता है, तो किन वस्तुओं का क्रय-विक्रय करने से वह स्वर्ग प्राप्ति के अधिकार से वंचित नहीं हो जाएगा॥3॥ | mahabharat अध्याय 12.78: आपत्तिकालमें ब्राह्मणके लिये वैश्यवृत्तिसे निर्वाह करनेकी छूट तथा लुटेरोंसे अपनी और दूसरोंकी रक्षा करनेके लिये सभी जातियोंको शस्त्र धारण करनेका अधिकार एवं रक्षकको सम्मानका पात्र स्वीकार करना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
युधिष्ठिर ने पूछा - भरतश्रेष्ठ! कृपा करके मुझे यह बताइए कि यदि कोई ब्राह्मण वैश्य धर्म से जीविका चलाते हुए व्यापार भी करता है, तो किन वस्तुओं का क्रय-विक्रय करने से वह स्वर्ग प्राप्ति के अधिकार से वंचित नहीं हो जाएगा॥3॥
Yudhishthir asked – Bharatshreshtha! Please tell me that if a Brahmin does business while earning his living through Vaishya religion, then by buying and selling which things he will not be deprived of the right to attain heaven. 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥