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mahabharat 12.78.29: यदि ब्राह्मण तीनों वर्णों की रक्षा के लिए शस्त्र भी उठा ले, तो भी उसे पाप नहीं लगता। इसी प्रकार विद्वान पुरुष युद्ध में शरीर त्याग से बढ़कर किसी अन्य धर्म को नहीं मानते। 29॥   |   mahabharat अध्याय 12.78: आपत्तिकालमें ब्राह्मणके लिये वैश्यवृत्तिसे निर्वाह करनेकी छूट तथा लुटेरोंसे अपनी और दूसरोंकी रक्षा करनेके लिये सभी जातियोंको शस्त्र धारण करनेका अधिकार एवं रक्षकको सम्मानका पात्र स्वीकार करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 78: आपत्तिकालमें ब्राह्मणके लिये वैश्यवृत्तिसे निर्वाह करनेकी छूट तथा लुटेरोंसे अपनी और दूसरोंकी रक्षा करनेके लिये सभी जातियोंको शस्त्र धारण करनेका अधिकार एवं रक्षकको सम्मानका पात्र स्वीकार करना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  12.78.29 
ब्राह्मणस्त्रिषु वर्णेषु शस्त्रं गृह्णन्न दुष्यति।
एवमेवात्मनस्त्यागान्नान्यं धर्मं विदुर्जना:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
यदि ब्राह्मण तीनों वर्णों की रक्षा के लिए शस्त्र भी उठा ले, तो भी उसे पाप नहीं लगता। इसी प्रकार विद्वान पुरुष युद्ध में शरीर त्याग से बढ़कर किसी अन्य धर्म को नहीं मानते। 29॥
 
Even if a Brahmin takes up arms to protect the three varnas, he does not feel guilty. Thus, learned men do not believe in any other religion greater than sacrificing one's body in battle. 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)