Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.78.25-27: जब ब्राह्मण का बल क्षीण हो जाता है, क्षत्रिय का पराक्रम क्षीण हो जाता है और सभी जातियों के लोग ब्राह्मणों के प्रति द्वेषभाव रखते हैं, तब जो वीर ब्राह्मण, धर्म और अपनी रक्षा के लिए अपने प्राणों की परवाह न करके दुष्टों के साथ क्रोधपूर्वक युद्ध करते हैं, उनका पवित्र यश सर्वत्र फैल जाता है, क्योंकि ब्राह्मणों की रक्षा के लिए शस्त्र उठाने का अधिकार सभी को है॥25-27॥ | mahabharat अध्याय 12.78: आपत्तिकालमें ब्राह्मणके लिये वैश्यवृत्तिसे निर्वाह करनेकी छूट तथा लुटेरोंसे अपनी और दूसरोंकी रक्षा करनेके लिये सभी जातियोंको शस्त्र धारण करनेका अधिकार एवं रक्षकको सम्मानका पात्र स्वीकार करना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ब्रह्मवीर्ये मृदुभूते क्षत्रवीर्ये च दुर्बले।
दुष्टेषु सर्ववर्णेषु ब्राह्मणान् प्रति सर्वश:॥ २५॥
ये तत्र युद्धं कुर्वन्ति त्यक्त्वा जीवितमात्मन:।
ब्राह्मणान् परिरक्षन्तो धर्ममात्मानमेव च॥ २६॥
मनस्विनो मन्युमन्त: पुण्यश्लोका भवन्ति ते।
ब्राह्मणार्थं हि सर्वेषां शस्त्रग्रहणमिष्यते॥ २७॥
अनुवाद
जब ब्राह्मण का बल क्षीण हो जाता है, क्षत्रिय का पराक्रम क्षीण हो जाता है और सभी जातियों के लोग ब्राह्मणों के प्रति द्वेषभाव रखते हैं, तब जो वीर ब्राह्मण, धर्म और अपनी रक्षा के लिए अपने प्राणों की परवाह न करके दुष्टों के साथ क्रोधपूर्वक युद्ध करते हैं, उनका पवित्र यश सर्वत्र फैल जाता है, क्योंकि ब्राह्मणों की रक्षा के लिए शस्त्र उठाने का अधिकार सभी को है॥25-27॥
When the power of a Brahmin wanes, the valour of a Kshatriya weakens and people of all castes develop animosity towards Brahmins, then the holy fame of those brave men who fight angrily with the wicked without caring for their lives for the protection of Brahmins, Dharma and themselves, spreads everywhere because everyone has the right to take up arms for the protection of Brahmins.॥25-27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥