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mahabharat 12.78.24: युधिष्ठिर! यद्यपि क्षत्रियों का बल और शक्ति प्रचण्ड और अजेय है, तथापि ब्राह्मणों का सामना होने पर वे शान्त हो जाते हैं।   |   mahabharat अध्याय 12.78: आपत्तिकालमें ब्राह्मणके लिये वैश्यवृत्तिसे निर्वाह करनेकी छूट तथा लुटेरोंसे अपनी और दूसरोंकी रक्षा करनेके लिये सभी जातियोंको शस्त्र धारण करनेका अधिकार एवं रक्षकको सम्मानका पात्र स्वीकार करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 78: आपत्तिकालमें ब्राह्मणके लिये वैश्यवृत्तिसे निर्वाह करनेकी छूट तथा लुटेरोंसे अपनी और दूसरोंकी रक्षा करनेके लिये सभी जातियोंको शस्त्र धारण करनेका अधिकार एवं रक्षकको सम्मानका पात्र स्वीकार करना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  12.78.24 
तस्माद् ब्रह्मणि शाम्यन्ति क्षत्रियाणां युधिष्ठिर।
समुदीर्णान्यजेयानि तेजांसि च बलानि च॥ २४॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! यद्यपि क्षत्रियों का बल और शक्ति प्रचण्ड और अजेय है, तथापि ब्राह्मणों का सामना होने पर वे शान्त हो जाते हैं।
 
Yudhishthira! Although the might and power of the Kshatriyas are tremendous and invincible, yet they become calm when they encounter a Brahmin. 24.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)