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mahabharat 12.78.20: भीष्मजी ने कहा - राजन! उस समय ब्राह्मणों को अपने तप, ब्रह्मचर्य, शस्त्र, बल, सत्य व्यवहार अथवा विवेक से, जिस प्रकार भी संभव हो, क्षत्रिय जाति का दमन करने का प्रयत्न करना चाहिए॥20॥   |   mahabharat अध्याय 12.78: आपत्तिकालमें ब्राह्मणके लिये वैश्यवृत्तिसे निर्वाह करनेकी छूट तथा लुटेरोंसे अपनी और दूसरोंकी रक्षा करनेके लिये सभी जातियोंको शस्त्र धारण करनेका अधिकार एवं रक्षकको सम्मानका पात्र स्वीकार करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 78: आपत्तिकालमें ब्राह्मणके लिये वैश्यवृत्तिसे निर्वाह करनेकी छूट तथा लुटेरोंसे अपनी और दूसरोंकी रक्षा करनेके लिये सभी जातियोंको शस्त्र धारण करनेका अधिकार एवं रक्षकको सम्मानका पात्र स्वीकार करना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  12.78.20 
भीष्म उवाच
तपसा ब्रह्मचर्येण शस्त्रेण च बलेन च।
अमायया मायया च नियन्तव्यं तदा भवेत्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी ने कहा - राजन! उस समय ब्राह्मणों को अपने तप, ब्रह्मचर्य, शस्त्र, बल, सत्य व्यवहार अथवा विवेक से, जिस प्रकार भी संभव हो, क्षत्रिय जाति का दमन करने का प्रयत्न करना चाहिए॥20॥
 
Bhishmaji said – King! At that time, Brahmins should try to suppress the Kshatriya caste in whatever way possible, through their penance, celibacy, weapons, force, honest behavior or discrimination. 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)