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mahabharat 12.78.17: जब पृथ्वी पर कोई विजयी राजा अपने राष्ट्र में कल्याणकारी शासन स्थापित करना चाहता है, तो उसे चाहिए कि वह यथासम्भव सभी जातियों के लोगों को अपने-अपने धर्म के पालन में लगाये रखे। ॥17॥   |   mahabharat अध्याय 12.78: आपत्तिकालमें ब्राह्मणके लिये वैश्यवृत्तिसे निर्वाह करनेकी छूट तथा लुटेरोंसे अपनी और दूसरोंकी रक्षा करनेके लिये सभी जातियोंको शस्त्र धारण करनेका अधिकार एवं रक्षकको सम्मानका पात्र स्वीकार करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 78: आपत्तिकालमें ब्राह्मणके लिये वैश्यवृत्तिसे निर्वाह करनेकी छूट तथा लुटेरोंसे अपनी और दूसरोंकी रक्षा करनेके लिये सभी जातियोंको शस्त्र धारण करनेका अधिकार एवं रक्षकको सम्मानका पात्र स्वीकार करना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  12.78.17 
यदा भुवि जयी राजा क्षेमं राष्ट्रेऽभिसंदधेत्।
तदा वर्णा यथाधर्मं निविशेयु: कथंचन॥ १७॥
 
 
अनुवाद
जब पृथ्वी पर कोई विजयी राजा अपने राष्ट्र में कल्याणकारी शासन स्थापित करना चाहता है, तो उसे चाहिए कि वह यथासम्भव सभी जातियों के लोगों को अपने-अपने धर्म के पालन में लगाये रखे। ॥17॥
 
When a victorious king on earth wishes to establish a benevolent rule in his nation, he should, in whatever way possible, keep people of all castes engaged in following their respective religions. ॥17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)