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mahabharat 12.78.16: जिस राजा की शक्ति क्षीण हो गई हो, उसका सबसे बड़ा सहायक ब्राह्मण ही कहा गया है; अतः बुद्धिमान राजा को ब्राह्मण के बल का आश्रय लेकर उन्नति करनी चाहिए॥16॥   |   mahabharat अध्याय 12.78: आपत्तिकालमें ब्राह्मणके लिये वैश्यवृत्तिसे निर्वाह करनेकी छूट तथा लुटेरोंसे अपनी और दूसरोंकी रक्षा करनेके लिये सभी जातियोंको शस्त्र धारण करनेका अधिकार एवं रक्षकको सम्मानका पात्र स्वीकार करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 78: आपत्तिकालमें ब्राह्मणके लिये वैश्यवृत्तिसे निर्वाह करनेकी छूट तथा लुटेरोंसे अपनी और दूसरोंकी रक्षा करनेके लिये सभी जातियोंको शस्त्र धारण करनेका अधिकार एवं रक्षकको सम्मानका पात्र स्वीकार करना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  12.78.16 
राज्ञोऽपि क्षीयमाणस्य ब्रह्मैवाहु: परायणम्।
तस्माद् ब्रह्मबलेनैव समुत्थेयं विजानता॥ १६॥
 
 
अनुवाद
जिस राजा की शक्ति क्षीण हो गई हो, उसका सबसे बड़ा सहायक ब्राह्मण ही कहा गया है; अतः बुद्धिमान राजा को ब्राह्मण के बल का आश्रय लेकर उन्नति करनी चाहिए॥16॥
 
A Brahmin is said to be the greatest helper of a king whose power is waning; hence, a wise king should prosper by taking recourse to the strength of a Brahmin.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)