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mahabharat 12.78.11: प्राचीन काल से ही ऋषियों और अन्य महात्माओं का आचरण ऐसा ही रहा है। यह सब सत्य है, इसमें कोई संदेह नहीं है। ॥11॥   |   mahabharat अध्याय 12.78: आपत्तिकालमें ब्राह्मणके लिये वैश्यवृत्तिसे निर्वाह करनेकी छूट तथा लुटेरोंसे अपनी और दूसरोंकी रक्षा करनेके लिये सभी जातियोंको शस्त्र धारण करनेका अधिकार एवं रक्षकको सम्मानका पात्र स्वीकार करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 78: आपत्तिकालमें ब्राह्मणके लिये वैश्यवृत्तिसे निर्वाह करनेकी छूट तथा लुटेरोंसे अपनी और दूसरोंकी रक्षा करनेके लिये सभी जातियोंको शस्त्र धारण करनेका अधिकार एवं रक्षकको सम्मानका पात्र स्वीकार करना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.78.11 
इत्येवं सम्प्रवर्तन्ते व्यवहारा: पुरातना:।
ऋषीणामितरेषां च साधु चैतदसंशयम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
प्राचीन काल से ही ऋषियों और अन्य महात्माओं का आचरण ऐसा ही रहा है। यह सब सत्य है, इसमें कोई संदेह नहीं है। ॥11॥
 
Since ancient times, the behaviour of sages and other noble souls has been like this. All this is correct, there is no doubt about it. ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)