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श्लोक  12.77.d5 
यक्षरक्ष:पिशाचेभ्यो नासुरेभ्य: कथञ्चन।
भयमुत्पद्यते तत्र यत्र विप्रा: सुसंयता:॥ )
 
 
अनुवाद
जहां ब्राह्मण अनुशासित जीवन जीते हैं, वहां यक्ष, राक्षस, भूत और दानवों का भय नहीं रहता।
 
Where Brahmins are leading a disciplined life, there is no fear from Yakshas, ​​Rakshasas, Ghosts and Demons.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)