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mahabharat 12.77.d4: जिस देश में उपर्युक्त दोष विद्यमान हों, वहाँ वर्षा नहीं होती, महामारियाँ फैलती हैं, भूखमरी का भय बना रहता है और भयंकर युद्ध छिड़ जाता है।   |   mahabharat अध्याय 12.77: केकयराज तथा राक्षसका उपाख्यान और केकयराज्यकी श्रेष्ठताका विस्तृत वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.77.d4 
अवृष्टिर्मारको रोग: सततं क्षुद्भयानि च।
विग्रहश्च सदा तस्मिन् देशे भवति दारुण:॥
 
 
अनुवाद
जिस देश में उपर्युक्त दोष विद्यमान हों, वहाँ वर्षा नहीं होती, महामारियाँ फैलती हैं, भूखमरी का भय बना रहता है और भयंकर युद्ध छिड़ जाता है।
 
In a country where the above mentioned defects are present, there is no rain. Epidemics spread, there is always a fear of hunger and a terrible war breaks out.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)