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mahabharat 12.77.d3: राक्षस ने कहा, 'स्त्रियों के व्यभिचार, राजाओं के अन्याय और ब्राह्मणों के बुरे कर्मों के कारण लोग भयभीत हो जाते हैं।   |   mahabharat अध्याय 12.77: केकयराज तथा राक्षसका उपाख्यान और केकयराज्यकी श्रेष्ठताका विस्तृत वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.77.d3 
राक्षस उवाच
(नारीणां व्यभिचाराच्च अन्यायाच्च महीक्षिताम्।
विप्राणां कर्मदोषाच्च प्रजानां जायते भयम्॥
 
 
अनुवाद
राक्षस ने कहा, 'स्त्रियों के व्यभिचार, राजाओं के अन्याय और ब्राह्मणों के बुरे कर्मों के कारण लोग भयभीत हो जाते हैं।
 
The demon said, 'People become afraid because of the adultery of women, the injustice of kings and the bad deeds of Brahmins.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)