Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.77.d2-24: मैं सर्वत्र निर्दोष और शुद्ध हूँ; मुझे कहीं भी विपत्ति का भय नहीं है। मैं धर्म के मार्ग पर चलने वाला गृहस्थ हूँ। आपने मेरे शरीर में कैसे प्रवेश किया? मेरे बुद्धिमान पुरोहित आत्मज्ञानी, तपस्वी और समस्त धर्मों के ज्ञाता हैं। वे सम्पूर्ण राष्ट्र के स्वामी हैं॥ 24॥ | mahabharat अध्याय 12.77: केकयराज तथा राक्षसका उपाख्यान और केकयराज्यकी श्रेष्ठताका विस्तृत वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
(शुक्लकर्मास्मि सर्वत्र न दुर्गतिभयं मम।
धर्मचारी गृहस्थश्च मामकान्तरमाविश:॥ )
आत्मविज्ञानसम्पन्नस्तपस्वी सर्वधर्मवित्।
स्वामी सर्वस्य राष्ट्रस्य धीमान् मम पुरोहित:॥ २४॥
अनुवाद
मैं सर्वत्र निर्दोष और शुद्ध हूँ; मुझे कहीं भी विपत्ति का भय नहीं है। मैं धर्म के मार्ग पर चलने वाला गृहस्थ हूँ। आपने मेरे शरीर में कैसे प्रवेश किया? मेरे बुद्धिमान पुरोहित आत्मज्ञानी, तपस्वी और समस्त धर्मों के ज्ञाता हैं। वे सम्पूर्ण राष्ट्र के स्वामी हैं॥ 24॥
I am blameless and pure everywhere; I have no fear of misfortune anywhere. I am a householder who follows the path of Dharma. How did you enter my body? My wise priests are self-aware, ascetics and know all the Dharmas. They are the masters of the entire nation.॥ 24॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥