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श्लोक  12.77.7 
केकयानामधिपतिं रक्षो जग्राह दारुणम्।
स्वाध्यायेनान्वितं राजन्नरण्ये संशितव्रतम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
राजन! एक समय की बात है, राजा केकय वन में कठोर व्रत-उपवास और स्वाध्याय करते हुए रहते थे। एक दिन एक भयंकर राक्षस ने उन्हें पकड़ लिया।
 
King! Once upon a time, King Kekaya lived in the forest and observed strict fasts (penance) and studied on his own. One day, a fierce demon caught him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)