Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.77.32: भीष्मजी कहते हैं - हे राजन! अतः ब्राह्मणों की सदैव रक्षा करनी चाहिए। जब वे सुरक्षित रहते हैं, तो वे राजाओं की रक्षा करते हैं। जो राजा उचित आचरण करते हैं, उन्हें ब्राह्मणों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। 32. | mahabharat अध्याय 12.77: केकयराज तथा राक्षसका उपाख्यान और केकयराज्यकी श्रेष्ठताका विस्तृत वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भीष्म उवाच
तस्माद् द्विजातीन् रक्षेत ते हि रक्षन्ति रक्षिता:।
आशीरेषां भवेद् राजन् राज्ञां सम्यक्प्रवर्तताम्॥ ३२॥
अनुवाद
भीष्मजी कहते हैं - हे राजन! अतः ब्राह्मणों की सदैव रक्षा करनी चाहिए। जब वे सुरक्षित रहते हैं, तो वे राजाओं की रक्षा करते हैं। जो राजा उचित आचरण करते हैं, उन्हें ब्राह्मणों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। 32.
Bhishmaji says - O King! Therefore, Brahmins should always be protected. When they are safe, they protect the kings. Kings who behave properly receive the blessings of Brahmins. 32.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥