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mahabharat 12.77.31: जो राजा ब्राह्मणों से पूर्व उत्पन्न होते हैं, जिनकी सबसे बड़ी शक्ति ब्राह्मण ही हैं और जिनकी प्रजा अतिथि-सत्कार में रुचि रखती है, वे निश्चय ही स्वर्गलोक को प्राप्त होते हैं ॥31॥   |   mahabharat अध्याय 12.77: केकयराज तथा राक्षसका उपाख्यान और केकयराज्यकी श्रेष्ठताका विस्तृत वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 77: केकयराज तथा राक्षसका उपाख्यान और केकयराज्यकी श्रेष्ठताका विस्तृत वर्णन  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  12.77.31 
येषां पुरोगमा विप्रा येषां ब्रह्म परं बलम्।
अतिथिप्रियास्तथा पौरास्ते वै स्वर्गजितो नृपा:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
जो राजा ब्राह्मणों से पूर्व उत्पन्न होते हैं, जिनकी सबसे बड़ी शक्ति ब्राह्मण ही हैं और जिनकी प्रजा अतिथि-सत्कार में रुचि रखती है, वे निश्चय ही स्वर्गलोक को प्राप्त होते हैं ॥31॥
 
Those kings who are preceded by Brahmins, whose greatest strength is the Brahmins and whose citizens are fond of hospitality, certainly attain possession of the heavenly world. ॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)