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श्लोक  12.77.29 
यस्मात् सर्वास्ववस्थासु धर्ममेवान्ववेक्षसे।
तस्मात् प्राप्नुहि कैकेय गृहं स्वस्ति व्रजाम्यहम्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
हे केकयनराज! आप सभी परिस्थितियों में सदैव धर्म का ध्यान रखते हैं, अतः सकुशल घर जाएँ। आपका कल्याण हो। मैं अब जा रहा हूँ।
 
O King of Kekayan! You always keep your eyes on Dharma in all situations, so go home safely. May you be blessed. I am leaving now.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)