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mahabharat 12.77.28: मेरे राज्य में रहने वाले लोग सदैव गौओं, ब्राह्मणों और यज्ञों की भलाई की प्रार्थना करते हैं, फिर भी आप मेरे शरीर में कैसे प्रविष्ट हुए? ॥28॥   |   mahabharat अध्याय 12.77: केकयराज तथा राक्षसका उपाख्यान और केकयराज्यकी श्रेष्ठताका विस्तृत वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.77.28 
गोब्राह्मणेभ्यो यज्ञेभ्यो नित्यं स्वस्त्ययनं मम।
आशासते जना राष्ट्रे मामकान्तरमाविश:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
मेरे राज्य में रहने वाले लोग सदैव गौओं, ब्राह्मणों और यज्ञों की भलाई की प्रार्थना करते हैं, फिर भी आप मेरे शरीर में कैसे प्रविष्ट हुए? ॥28॥
 
The people living in my kingdom always pray for the well-being of cows, brahmins and sacrifices, yet how did you enter my body? ॥28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)