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mahabharat 12.77.23: मैं विद्वानों, वृद्धों और तपस्वियों का कभी अनादर नहीं करता। जब सारा राष्ट्र सोता है, तब मैं उसकी रक्षा के लिए जागता रहता हूँ। किन्तु आपने मेरे शरीर में प्रवेश कैसे किया?॥23॥   |   mahabharat अध्याय 12.77: केकयराज तथा राक्षसका उपाख्यान और केकयराज्यकी श्रेष्ठताका विस्तृत वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.77.23 
नावजानाम्यहं वैद्यान्न वृ॒॒द्धान्न तपस्विन:।
राष्ट्रे स्वपति जागर्मि मामकान्तरमाविश:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
मैं विद्वानों, वृद्धों और तपस्वियों का कभी अनादर नहीं करता। जब सारा राष्ट्र सोता है, तब मैं उसकी रक्षा के लिए जागता रहता हूँ। किन्तु आपने मेरे शरीर में प्रवेश कैसे किया?॥23॥
 
I never disrespect learned people, elders and ascetics. When the whole nation sleeps, I remain awake to protect it. But how did you enter my body?॥23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)