Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.77.21: मैं देवताओं, पितरों तथा अतिथियों को अपना भाग अर्पित किए बिना कभी भोजन नहीं करता। मैं कभी किसी दूसरे की स्त्री के साथ संबंध नहीं रखता तथा उसके साथ कभी स्वच्छंदतापूर्वक क्रीड़ा नहीं करता, फिर आप मेरे शरीर में कैसे आए? | mahabharat अध्याय 12.77: केकयराज तथा राक्षसका उपाख्यान और केकयराज्यकी श्रेष्ठताका विस्तृत वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नासंविभज्य भोक्तास्मि नाविशामि परस्त्रियम्।
स्वतन्त्रो जातु न क्रीडे मामकान्तरमाविश:॥ २१॥
अनुवाद
मैं देवताओं, पितरों तथा अतिथियों को अपना भाग अर्पित किए बिना कभी भोजन नहीं करता। मैं कभी किसी दूसरे की स्त्री के साथ संबंध नहीं रखता तथा उसके साथ कभी स्वच्छंदतापूर्वक क्रीड़ा नहीं करता, फिर आप मेरे शरीर में कैसे आए?
I never eat without offering my share to the gods, ancestors and guests. I never have relations with another's wife and never play with her freely, then how did you enter my body?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥