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mahabharat 12.77.2: भीष्मजी बोले- हे राजन! ब्राह्मणों को छोड़कर शेष सभी जातियों के धन का स्वामी राजा ही होता है, यह वैदिक मत है। ब्राह्मणों में भी यदि कोई अपनी जाति के विरुद्ध कार्य करता है, तो उसके धन पर राजा का ही अधिकार होता है।॥ 2॥   |   mahabharat अध्याय 12.77: केकयराज तथा राक्षसका उपाख्यान और केकयराज्यकी श्रेष्ठताका विस्तृत वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 77: केकयराज तथा राक्षसका उपाख्यान और केकयराज्यकी श्रेष्ठताका विस्तृत वर्णन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.77.2 
भीष्म उवाच
अब्राह्मणानां वित्तस्य स्वामी राजेति वैदिकम्।
ब्राह्मणानां च ये केचिद् विकर्मस्था भवन्त्युत॥ २॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी बोले- हे राजन! ब्राह्मणों को छोड़कर शेष सभी जातियों के धन का स्वामी राजा ही होता है, यह वैदिक मत है। ब्राह्मणों में भी यदि कोई अपनी जाति के विरुद्ध कार्य करता है, तो उसके धन पर राजा का ही अधिकार होता है।॥ 2॥
 
Bhishmaji said- O King! The king is the owner of the wealth of all castes except Brahmins, this is the Vedic opinion. Even among Brahmins, if someone does work contrary to his caste, the king has the right over his wealth.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)