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mahabharat 12.77.13-14: मेरे राज्य के क्षत्रिय अपने वर्ण के अनुसार कर्म करते हैं। वे वेदों का अध्ययन तो करते हैं, पर उन्हें पढ़ाते नहीं। वे यज्ञ करते हैं, पर करवाते नहीं। वे दान देते हैं, पर स्वयं ग्रहण नहीं करते। मेरे राज्य के क्षत्रिय भिक्षा नहीं मांगते। भिखारी जो कुछ मांगता है, उसे वे स्वयं दे देते हैं। वे सत्यनिष्ठ और धर्मपालन में कुशल हैं। वे ब्राह्मणों की रक्षा करते हैं और युद्ध में कभी पीठ नहीं दिखाते। फिर आपने मेरे शरीर में प्रवेश कैसे किया?॥13-14॥   |   mahabharat अध्याय 12.77: केकयराज तथा राक्षसका उपाख्यान और केकयराज्यकी श्रेष्ठताका विस्तृत वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 77: केकयराज तथा राक्षसका उपाख्यान और केकयराज्यकी श्रेष्ठताका विस्तृत वर्णन  »  श्लोक 13-14
 
 
श्लोक  12.77.13-14 
न याचन्ते प्रयच्छन्ति सत्यधर्मविशारदा:।
नाध्यापयन्त्यधीयन्ते यजन्ते याजयन्ति न॥ १३॥
ब्राह्मणान् परिरक्षन्ति संग्रामेष्वपलायिन:।
क्षत्रिया मे स्वकर्मस्था मामकान्तरमाविश:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
मेरे राज्य के क्षत्रिय अपने वर्ण के अनुसार कर्म करते हैं। वे वेदों का अध्ययन तो करते हैं, पर उन्हें पढ़ाते नहीं। वे यज्ञ करते हैं, पर करवाते नहीं। वे दान देते हैं, पर स्वयं ग्रहण नहीं करते। मेरे राज्य के क्षत्रिय भिक्षा नहीं मांगते। भिखारी जो कुछ मांगता है, उसे वे स्वयं दे देते हैं। वे सत्यनिष्ठ और धर्मपालन में कुशल हैं। वे ब्राह्मणों की रक्षा करते हैं और युद्ध में कभी पीठ नहीं दिखाते। फिर आपने मेरे शरीर में प्रवेश कैसे किया?॥13-14॥
 
The Kshatriyas in my kingdom are engaged in the duties befitting their Varna. They study the Vedas but do not teach them. They perform Yajnas but do not get them performed. They give alms but do not take them themselves. The Kshatriyas of my kingdom do not beg. They themselves give whatever the beggars ask for. They are truthful and skilled in the fulfillment of Dharma. They protect Brahmins and never turn their backs in war. Then how did you enter my body?॥13-14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)