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mahabharat 12.77.11: मेरे राज्य के ब्राह्मण अध्ययन और अध्यापन करते हैं, यज्ञ करते और करवाते हैं, दान देते और लेते हैं। इस प्रकार वे ब्राह्मण के योग्य छह कर्मों में लगे रहते हैं॥ 11॥   |   mahabharat अध्याय 12.77: केकयराज तथा राक्षसका उपाख्यान और केकयराज्यकी श्रेष्ठताका विस्तृत वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.77.11 
अधीयतेऽध्यापयन्ति यजन्ते याजयन्ति च।
ददति प्रतिगृह्णन्ति षट्सु कर्मस्ववस्थिता:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
मेरे राज्य के ब्राह्मण अध्ययन और अध्यापन करते हैं, यज्ञ करते और करवाते हैं, दान देते और लेते हैं। इस प्रकार वे ब्राह्मण के योग्य छह कर्मों में लगे रहते हैं॥ 11॥
 
The Brahmins of my kingdom study and teach, perform and get sacrifices performed, give and take donations. In this way they remain engaged in the six activities befitting a Brahmin.॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)