| श्री महाभारत » पर्व 12: शान्ति पर्व » अध्याय 76: उत्तम-अधम ब्राह्मणोंके साथ राजाका बर्ताव » श्लोक d4 |
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| | | | श्लोक 12.76.d4  | (यज्ञ: श्रुतमपैशुन्यमहिंसातिथिपूजनम्।
दम: सत्यं तपो दानमेतद् ब्राह्मणलक्षणम्॥ ) | | | | | | अनुवाद | | यज्ञ करना, वेदों का अध्ययन करना, चुगली न करना, मन, वाणी या कर्म से किसी प्राणी को कष्ट न देना, अतिथि पूजन, इन्द्रियों को वश में रखना, सत्य बोलना, तप करना और दान देना, ये सभी ब्राह्मण के लक्षण हैं। | | | | Performing sacrifices, studying the Vedas, not backbiting, not hurting any living being through thought, speech or action, worshipping guests, controlling the senses, speaking the truth, performing austerities and giving charity are all the characteristics of a Brahmin. | | | इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि षट्सप्ततितमोऽध्याय:॥ ७६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें छिहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ७६॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ४ श्लोक मिलाकर कुल १८ श्लोक हैं) | | | | ✨ ai-generated | | |
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