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mahabharat 12.76.d3: जो मूर्ख ब्राह्मण ऋग्वेद, यजुर्वेद और सामवेद के मन्त्रों की निन्दा करता है, वह एक कल्प तक विभिन्न प्राणियों के मल में कीड़ा बनता है।   |   mahabharat अध्याय 12.76: उत्तम-अधम ब्राह्मणोंके साथ राजाका बर्ताव   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.76.d3 
ब्राह्मणो ऋग्यजु:साम्नां मूढ: कृत्वा तु विप्लवम्।
कल्पमेकं कृमि:सोऽथ नानाविष्ठासु जायते॥ )
 
 
अनुवाद
जो मूर्ख ब्राह्मण ऋग्वेद, यजुर्वेद और सामवेद के मन्त्रों की निन्दा करता है, वह एक कल्प तक विभिन्न प्राणियों के मल में कीड़ा बनता है।
 
The foolish Brahmin who reviles the mantras of the Rigveda, Yajurveda and Samaveda, becomes a worm in the feces of various creatures for one Kalpa.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)