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mahabharat 12.76.10: ब्राह्मणों को छोड़कर शेष सभी जातियों के धन का स्वामी राजा है, यह वैदिक सिद्धान्त है। जो ब्राह्मण अपनी जाति के विपरीत कर्म करते हैं, उनके धन पर भी राजा का अधिकार है।॥10॥   |   mahabharat अध्याय 12.76: उत्तम-अधम ब्राह्मणोंके साथ राजाका बर्ताव   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 76: उत्तम-अधम ब्राह्मणोंके साथ राजाका बर्ताव  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  12.76.10 
अब्राह्मणानां वित्तस्य स्वामी राजेति वैदिकम्।
ब्राह्मणानां च ये केचिद् विकर्मस्था भवन्त्युत॥ १०॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मणों को छोड़कर शेष सभी जातियों के धन का स्वामी राजा है, यह वैदिक सिद्धान्त है। जो ब्राह्मण अपनी जाति के विपरीत कर्म करते हैं, उनके धन पर भी राजा का अधिकार है।॥10॥
 
The king is the owner of the wealth of all the castes except the Brahmins, this is the Vedic principle. The king has the right over the wealth of those Brahmins who perform actions contrary to their caste.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)